अपने पीए और मित्र हरिओम की मौत पर चुप क्यों हैं शिवराज!

क्या राज छुपा है शिवराज और हरिओम के बीच?

ये बात बहुत कम लोगों को पता है कि जब शिवराज सिंह चौहान पहली बार विधायक बने थे तब ,उन्होंने अपने मित्र डोबी ( जिला सीहोर CM के गांव जैत से 3-4 Km ) निवासी हरिओम को अपना निजी सहायक बनाया था.दरअसल हरिओम शिवराज जी के गांव जैत के करीब का था और बसों में टिकट काटकर अपना परिवार चलाता था.वो शिवराज जी को पहले बस में फ्री यात्रा करवाता था. दोस्त विधायक बन गया तो हरिओम अपने मित्र के साथ हो गया. धीरे धीरे शिवराज जी आगे बढते गए. फिर सासंद बने और दिल्ली के नार्थ एवेन्यू में उन्हे एक फ्लैट आवंटित हुआ..हरिओम उनके साथ ही था.
एक दिन अचानक क्या हुआ. हरिओम की लाश विदिशा के रेल्वे ट्रेक पर मिली , “आप सोच रहे होंगे हडकंप मच गया होगा.” खानापूर्ती के लिए जांच हुई, मामला चारों चरफ से दब गया जानकारी तो ये भी मिली थी कि उसकी जेब में सुसाइट नोट था. भगवान जाने कहां गया ! मीडिया ने इस मुद्दे को न छापा न दिखाया और न कांग्रेस ने कोई दबाब बनाया. शिवराज की जांच नहीं कराने की इस करतूत पर पूरी कांग्रेस छुप क्यों थी और हैं ? शायद समझने वाली बात है. व्यापमं घोटाला,डंफर कांड,रेत चोरी और भी दर्जनों मामलों में फंसे शिवराज से कम से कम हरिओम की मौत का जबाव तो लिया जाना चाहिए.
अपने आप को जनता का सेवक और जनता को भगवान मानने वाले शिवराज ने अपने निजी सहायक की हत्या को क्यों दबाया. क्या राज है इस मौत के पीछे, जबाव दो ?

पत्रकार नितिन दुबे की फेसबुक वॉल से

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