अब ये क्या नौटंकी है? गिरफ्तार करो मुझे!

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अब मैं आप ही से सवाल पूछता हूं कि आप थाने के सामने जाकर कहें कि आइए। पुलिस मुझे गिरफ्तार करो । मेरे ऊपर आरोप सिद्ध करो। यह क्या तुक है। ये कौन सा तरीका है राजनीति करने का । इससे जनता को क्या मिलेगा?हाँ इससे लोगों का समय खराब होगा, सरकारी पैसा मशीनरी और मेन पावर का दुरुपयोग होगा। क्या यही तैयारी है 5 साल की? जनता को इस तरह के मुद्दों में उलझाकर समय खराब करना। दरअसल इस मामले का दूसरा पहलू मैं आपको बताना चाहता हूं वो ही इस आन्दोलन का जनक है। कांग्रेस में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। पहले कुछ गुट हुआ करते थे अब चुनाव के ऐन वक्त कांग्रेस कई गुटों में बट गई है। दिग्विजय गुट सिंधिया गुट कमलनाथ गुट राहुल भैया गुट सुरेश पचौरी अरूण यादव गुट और अब तो इन गुटों के नीचे भी गुट बन गए हैं। यह आंदोलन इसी गुट गुट का नतीजा है। दिग्विजय सिंह इस आंदोलन के जरिए अपनी ताकत बताना चाहते हैं वह हाईकमान और जनता में अपनी लोकप्रियता का पैमाना दर्शा रहे हैं। कुल मिलाकर वो ये साबित करना चाहते हैं कि वो ही मध्यप्रदेश के सबसे बड़े और लोकप्रिय नेता हैं और ये चुनाव शिवराज और उनके ही बीच है। यह खटास तब और बड़ गई जब कमलनाथ ने कहा कि दिग्विजय सिंह को उनके कर्मों की सजा मिल गई। दिग्गी ने इस बयान का मतलब बहुत गलत लिया और उन्हें लगा कि उनके कार्यकाल की उपलब्धियों को कमलनाथ खारिज कर रहे हैं। आश्चर्य की बात है कि व्यापम मामले में इस तरह कांग्रेस के नेता गिरफ्तारी देने थाने नहीं आए ।अवैध रेत उत्खनन के मामले में ,डंपर के मामले में और भी न जाने कितने प्रकरण जो शिवराज सरकार के खिलाफ हैं उनमें इन नेताओं ने गिरफ्तारी देने कि इस तरह आंदोलनात्माक जहमत नहीं उठाई। कारण, सबकुछ तरीके से मैनेज है। केवल जनता को छोड़कर।
पत्रकार नितिन दुबे की फेसबुक वॉल से

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