अमेरिका के इस फैसले से मोदी के इस प्रोजेक्ट को मिलेगी मजबूती

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हाल ही में अमेरिका ने भारत को एसटीए-1 का दर्जा दिया है. ये दर्जा मिलने से भारत को कई फायदे होंगे. जिसमें अमेरिकी कंपनियों की तरफ से ईजाद की गई तकरीबन 90 फीसदी तकनीकी और हथियार भारत लाने के लिए अब लाइसेंस लेने की जरुरत नहीं पड़ेगी. इससे पहले लाइसेंस लेने की जरुरत होती थी.
भारत को STA-1 का दर्जा मिलने से पीएम मोदी के पंसंदीदा प्रोजेक्ट मेक इन इंडिया को मजबूती मिल सकती है साथ ही इससे ये स्पष्ट होता है कि, ट्रप प्रशासन भारत के लिए कितना गंभीर है. इस प्राधिकरण के दर्जे के बाद भारत और अमेरिकी कंपनियां मिलकर भारत में हथियार व अन्य उच्च तकनीकी वाले उपकरणों का निर्माण कर दूसरे देशों को बेच सकती हैं.
भारत को क्या मिलेगा 
STA-1 का दर्जा मिलने से भारत अमेरिका से अत्याधुनिक और संवेदनशील टेक्नोलॉजी खरीद पाएगा. इससे दोनों पक्षों के बीच व्यापार बढ़ेगा. और सुरक्षा व्यापार रिश्ते मजबूत होंगे. जिसके परिणास्वरूप भारत में अमेरिका से होनेवाले निर्यात में वृद्धि होगी. इससे जो हथियार भारत NSG का दर्जा मिलने का बाद खरीदता वह अब सीधे मैनुफेक्चरिंग कर सकता है. साथ ही ट्रंप प्रशासन ने भारत को ड्रोन देने का भी वादा किया है.
वहीं अमोरिका की कंपनियां को भारत के उच्च तकनीक एवं सैन्य साजो-सामान बनाने वाली कंपनियों को पहले से कहीं ज्यादा रेंज के प्रॉडक्ट्स निर्यात करने का मौका मिलेगा. भारत को मिला नया दर्जा अमेरिकी मैन्युफैक्चरर्स को लाभ पहुंचाएगा। इस क्रम में अमेरिकी की राष्ट्रीय सुरक्षा को भी कोई आंच नहीं आएगी
साथ ही कयास लगाए जा रहे हैं कि, इस दर्जे से एनएसजी वाले फायदे मिलेंगे. विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार अमेरिका के इस फैसले ने भारत के लिए NSG की सदस्यता लेने की अनिवार्यता को भी कम कर दिया है, क्योंकि NSG की सदस्य लेकर भारत जिन संवेदनशील रक्षा उपकरणों या हथियारों को हासिल करता, अब वह अमेरिका से इस फैसले के आधार पर ले सकता है. यही वजह है कि इस फैसले के बाद भारतीय व अमेरिकी रक्षा कंपनियों के लिए तेजी से गठबंधन होने के आसार हैं.

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