दानवेंद्र सिंह तोमर | धरती पर पाये जाने वाले समस्त जीवों को इस विचित्र दुनिया को देखने के लिए आँखों का अहम रोल होता है, आंखे ही है जो हमें अहसास कराती हैं, सुंदरता नाम की भी कोई चीज होती है. और आंखे इस प्रकृति का बड़ी इमानदारी और सुंदरता से बखान करती है. आँखों के बिना कोई भी जीव पूरा नहीं है. इसलिए कहते हैं आंखें हैं तो जहान है.
लेकिन व्यक्ति की आंखों की बनावट हमारे मष्तिस्क के बाद शरीर के अंगों में सबसे जटिल हैं. आइये जानते हैं आंखों के बारे वो जानकारी जो आपने पहले कभी नहीं जानी होगी.
एक सर्वे के यह बात सामने आई है कि, भारत में अगर किसी को आंखों की प्रॉबलम होती है तो हम में से 44 प्रतिशत भारतीय नियमित तौर पर नेत्र विशेषज्ञ के पास नहीं जाते. साथ ही सर्वे में एक बात और सामने आई है कि, हम लोग बल्ब खरीदते समय यह भी ध्यान रखते हैं कि, हमारी आंखों के लिए वह आरामदायक है या नहीं.
हमारी आंख 576 मेगापिक्सल की होती है. 576 मेगापिक्सल की आंखे किसी जगह को फोकस करने में केवल 2 मिली सेकंड का समय लगाती है. और ऐसा कैमरा बनाना इंसानों के बस में नहीं है.
हमारी आंखे 48 किलोमीटर तक एक जलती हुई मोमबत्ती देख सकती हैं. इंसानों में 40 सा की उम्र के बाद सामान्य तौर पर चश्मा लग जाता है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ आंखों का लैंस मोटा होता जाता है, लेकिन हमारी आंखें जन्म से लेकर मृत्यु तक एक जैसी बनी रहती हैं.
नीली आंखों वाले लोग सूर्य की चमक को ज्यादा सहन नहीं कर पाते. इससे 10 हजार साल पहले नीली आंख वाले लोग ही नहीं हुआ करते थे. हमारी एक आंख का वजन 8 ग्राम होता है.

हमारी आंखे में 3 रंग होते हैं लाल, नीला और हरा, बाकी जितने भी आंखों के रंग होते हैं वह इन्हीं तीनों रंगों को मिलाकर बनते हैं. न्यू बोर्न बेबी 15 इंच दूर तक ही देख पाता है. 48 घंटे के अंदर हमारी आंखें धूल मिट्‌टी अपने आप छान लेती है और उसे ठीक कर लेती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि, 65 फीसदी दिमाग सिर्फ आंखों को संभालने में ही लग जाता है.

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