आरुषी संस्था कर रही महिलाओं को सशक्त, उम्मीद प्रोजेक्ट में बन रहे सेनेटरी नैपकिन

[SANWER SHAFI] भारत में इतना डेवलपमेंट होने के बाद आज भी पीरियड्स के बारे में धीमी आवाज में ही बात की जाती है. हालांकि आज के दौर की महिलाएं बहुत ही खुले विचारों की हैं, लेकिन फिर भी ऐसी कई महिलाएं हैं, जो आज भी पुराने रिवाजों को महीने के उन में अपनाती है और सेनेटरी नैपकिन से वंचित रहती है. क्योंकि आज भी लोगों की मानसिकता नहीं बदली है. लोगों की मानसिकता बदलने के लिए सरकार भी आए दिन महिलाओं के लिए कई ऐसे कार्य कर रही हैं जो कल्पनाओं से भी परे होते है.

हाल ही में भोपाल रेल्वे स्टेशन में पर एक ऑटोमेटिक सेनेटरी नैपकिन डिस्पेंसर मशीन लगाई गई है. ये महिला यात्रियों के एक अच्छी सौगात है, क्योंकि इस मशीन से पांच रूपए में ऑर्गेनिक रॉ मटेरियल से बने दो नैपकिन खरीद सकते हैं. इस मशीन से रोजाना  60-70 पैड्स खरीदे जा रहे है. और इसकी पूर्ति करने के लिए आरूषि संस्थान के ‘उम्मीद’ प्रोजेक्ट से जुड़कर महिलाएं ही सेनेटरी नैपकिन बना रही है.आरूषि संस्थान की इन महिलाओं ने बताया कि, लोगों की मानसिकता बदलने के लिए ही हम इस प्रोजेक्ट से जुड़कर काम कर रहे हैं.

8 दिन की ट्रेनिंग में सीखे नेपकिन बनाना

आरूष्रि संस्थान की प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर सपना गुप्ता ने बताया कि, इन प्रोजेक्ट के  तहत काम करने वाली महिलाओं को लगभग एक सप्ताह की ट्रेनिंग दी गई है, जिसमें उनको नैपकिन बनाना सिखाया गया है. उन्होंने बताया ट्रेनिंग से महिलाओं को नैपकिन बनाने में मदद मिलने के साथ ही किसी भी तरह की कोई भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है.

हयूमन और ईको फ्रेंडली है यह सेनेटरी पैड्स

संस्थान में सेनेटरी नेपकिन बनाने काम पिछले तीन-चार महीनों से किया जा रहा है. भोपाल ब्रांच में शहर की पांच महिला इस प्रोजेक्ट  से जुड़कर नैपकिन बना रही हैं. प्रोजेक्ट कोर्डिनेर सपना ने बताया कि, इस प्रोजेक्ट का नाम गुलजार साहब ने ‘उम्मीद’ रखा था.

मशीन में कटिंग और प्रेसिंग की जाती है

ऑर्गेनिक रॉ मटेरियल का उपयोग करते इन नैपकिन को बनाया जा रहा है. इसे बनाने का पूरा काम हाथ से ही किया जाता है. लेकिन कटिंग और प्रेसिंग करने के लिए मशीन का उपयोग किया जाता है और पैड्स को सील करने से लेकर ग्लू लगाना और पैक करने तक के सारे काम महिलाएं अपने हाथ से ही करती हैं.

रोजाना 60-70 पैड्स खरीदे जा रहे है डिस्पेंसरी से 

भोपाल रेल्वे स्टेशन पीआरओ आईए सिद्दीकी ने बताया कि, प्लेफार्म नंबर एक 26 जनवरी से एक और ऑटोमेटिक सेनेटरी नैपकिन डिस्पेंसर इंस्ट्राल किया. साथ ही लेडीज वेटिंग रूम भी इंस्ट्राल किया.

महिला सशक्तिकरण और हेल्थ के प्रति करना है जागरुक

प्रोजेक्ट मैनेजर निधिका मीना बताती हैं कि, आरुषि स्थित प्रोडक्शन यूनिट में पांच महिलाएं रोज लगभग 700 पैड्स बनाती हैं. प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और हेल्थ के प्रति लोगों में जागरूकता लाना है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here