करन सिंह वर्मा राजनीति के महायोद्धा, जानिये उनका राजनैतिक सफरनामा

0
3184
सीहोर जिले के छोटे से गांव जामोनिया हटेसिंह में जन्म लेने वाले  एक गरीब किसान का बेटा, कैसे प्रदेश का मंत्री बना आइये जानते हैं अटल जी, मोदी जी, कुशाभाऊ ठाकरे, को अपना मार्गदर्शन मानने वाले करण सिंह वर्मा ने राजनीति की शुरूआत सन् 1971 में की वर्मा.  इस दौरान RSS के साथ भी जुडे रहे. जिसके बाद वे बीजेपी में कई पदों पर रहे. 1971 से राजनीति में सक्रिय रहने वाले करण सिंह ने पहला चुनाव सन् 1985 में इछावर से लडा था. जिसके बाद वो लगातार 2013 तक इस सीट से विधायक रहे. यानि कि 6 बार विधायक जो की इच्छावर विधानसभा में एक रिकार्ड है. 2004 में करण सिंह वर्मा प्रदेश की उमा भारती सरकार में ग्रामीण विकास मंत्रालय में मंत्री बने. फिर सन् 2008 से 2013 तक राजस्व मंत्री रहे.
करन सिंह वर्मा का लोहा उनके विपक्ष के नेता भी मानते पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उनके कार्यकाल में कहा था कि, यदि कोई विधायक काम करता है तो वो इच्छावर से करन सिंह वर्मा और कांग्रेस नेता अजय सिंह ने  विधानसभा में पूर्व मंत्री की ईमानदारी और काम की तरीफ कर चुके हैं. करन सिंह वर्मा अपने सरल स्वभाव और ईमानदार छवि के लिए पहचाने जाते है. वर्मा ने बताया कि, जब वे राजनीति में आये थे तब इछावर में कांग्रेस का बोलबाला था और बीजेपी की हालत बहुत ही खराब थी मैंने गांव गांव जाकर लोगों को बीजेपी के पक्ष में किया और अपने पहले चुनाव में करीब 4 हजार वोटों से जीत हासिल की. और ये सीट कांग्रेस से छीन कर बीजेपी की झोली में डाली. लेकिन 2013 के विधानसभा चुनाव में करण सिंह वर्मा की लडाई कांग्रेस के शैलेंद्र पटेल से थी. वर्मा पटेल से चुनाव करीब महज 700+  वोटों से हार गए थे. इस पर करण सिंह वर्मा ने कहा कि, कुछ लोगो ने मेरे खिलाफ गंदी राजनीति की मेरा स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहा था और मुझे विकास का घमंड हो गया था मेरी भावना रही थी कि मैंने इच्छावर विधानसभा में बहुत विकास किया है तो बीजेपी जरूर जितेगी.
वर्मा ने अपने विरोधियों पर निशाना साधा और कहां की अभी तक कांग्रेस के विधायक शैलेंद्र पटेल ने कुछ काम नहीं करवाया है जिससे जनता को उनसे उम्मीद थी . करण सिंह वर्मा जब मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रहे तो उन्होनें  अपने कार्यकाल के कुछ अहम  कामों का जिक्र किया. जिसमें  भू-अधिकार पत्र को एक रूपये 93 पैसे में छपवाना, किसानों को राहत राशि देना, कई गावों में सड़क निर्माण, चाहे वो  सीहोर से इच्छावर सड़क मार्ग हो, या इच्छावर से नसरुलागंज मार्ग वर्मा ने इच्छावर आदिवासी इलाकों में भी विभिन्न विकास करवायें. बात की जाए अगर करण सिंह वर्मा की तो इनका जनता के बीच रूतबा बरकरार हैं. इच्छावर में इनका 30 सालों से लगातार जीतते आना इस बात का प्रमाण है कि, 2013 में हार के बावजूद भी इच्छावर विधानसभा में ये एकमात्र नेता हैं जो निरंतर सक्रिय हैं और जनता के बीच में अपनी सेवाएं दे रहे हैं तथा जनता की समस्याओं को दूर कर रहे हैं और इनके सुपुत्र विष्णु वर्मा भी अब राजनीति में सक्रिय हैं. करण सिंह वर्मा 2018 के चुनाव में बीजेपी से अपनी उम्मीदवारी जता चुके है वहीं बीजेपी से अन्य नेता भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे है अन्य लोगों के चुनाव लड़ने के सवाल पर वर्मा जी ने कहा कि, पार्टी को तय करना है कि, किसको टिकट देना है. टिकट मांगना सबका अधिकार है.
इच्छावर बीजेपी में गुटबाजी को लेकर करण सिंह वर्मा का कहना है कि, इस बार कोई गुटबाजी नहीं है और अगर कोई दावेदारी जता रहा है तो उनसे संवाद के जरिए गुटबाजी समाप्त करने की कोशिश करेंगे और करण सिंह ने कहा कि, वे 2018 का चुनाव विकास के नाम पर लडेंगें ना कि जातिवाद के नाम पर वर्मा जी बताते है कि, उन्होनें बीते 5 साल और विकास यात्रा के दौरान 271 गांवों में घूम घूम कर जनता की समस्याओं का निराकरण किया है और करते रहेंगे अगर इच्छावर की बात करें, तो यहां दशकों से करण सिंह वर्मा अपने खाती समाज एवं विकास के बल पर जीतते आए हैं
वर्तमान विधायक शैलेंद्र पटेल भी खाती समाज से आते है. बीजेपी से दावेदारी जताने वाले अजय पटेल भी इसी समाज से ताल्लुक रखते है बाकि के अन्य समाज के लोग भी अपनी दावेदारी जता रहे है. इछावर में खाती समाज के बाद अल्पसंख्यक वर्ग और अनुसूचित जन जाति वर्ग मतदाताओं का भी बोलबाला रहता है. लेकिन हर बार संख्या बल के आधार पर खाती समाज अपने प्रतिनिधि को जिता ले जाता है. देखने वाली बात तो यह होगी कि, दशकों से चली आ रही परंपरा क्या इस बार भी बरकरार रहेगी.
 जब हमने सवाल किया कि, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और सीएम शिवराज सिंह चौहान में से आप अपना प्रिय किसको मानते है तो वर्मा जी ने कहा कि दोनों मेरे लिए खास है और दोनों का में सम्मान करता हूं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here