कहां गया प्रेमचंद्र का साहित्य ?

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सनव्वर शफी| प्रेमचंद का साहित्य समाज के मन को छूता है. आज भी उनका नाम युवा पीढ़ी की जुबान पर होता है. हालांकि उनकी किताबों का क्रेज यूथ में कुछ कम हुआ है. क्योंकि उसकी भाषा उन्हें कुछ टफ  लगती है. लेकिन युवा प्रेमचंद के व्यक्तित्व से पूरी हद तक वाकिफ  हैं. उन्हें पता है कि साहित्य जगत में जिनका नाम पूरे सम्मान से हमेशा लिया जाएगा वह प्रेमचंद ही हैं. लेकिन आज के बदलते परिवेश में यूथ में उनके लिट्रेचर को पढऩे का क्रेज कुछ कम हुआ है. वहीं, शिक्षविद् मानते हैं कि उनके साहित्य को युवा तक पहुंचाया जाए, ताकि उन्हें जनमानस से जुड़ी समस्याएं पता लग सकें, उनका कहना है कि उनकी कहानियां आज भी उतनी ही मायने रखती है, जितनी की पहले रखा करती थीं.
बुक स्टोर पर भी नहीं मिलतीं ज्यादा किताबें
इब्राहिमपुरा मार्केट स्थित एक बुक स्टोर के मैनेजर शिवम मेहरा ने बताया कि प्रेमचंद के साहित्य की बहुत अधिक डिमांड तो नहीं है. लेकिन फिर भी लोग आते हैं. कभी लाइब्रेरी से डिमांड आ जाती है, तो कभी प्रोजेक्ट या रिसर्च कर रहे स्टूडेंट्स डिमांड करते हैं. लेकिन हम स्टोर में हमेशा प्रेमचंद का साहित्य रखते हैं क्योंकि कभी एकदम से डिमांड आती है.
साहित्य की भाषा होता है कठिन
जितेश ने बताया कि, प्रेमचंद के बारे में काफी सुना है. उनके शॉर्ट फ्रिक्शन कुछ पढ़े हैं लेकिन वह काफी सीरियस टाइप के हैं. भाषा बेहद टफ, उर्दू का अधिक प्रयोग होने की वजह से कुछ मुश्किलें आती हैं. कई बार तो साहित्य की भाषा इतनी कठिन लगती है कुछ समझ ही नहीं आता है.
छात्र शुभम चौहान ने बताया कि, प्रेमचंद की कहानियों को सिलेबस में शामिल किया जाए तो युवा उसे पढ़ेंगे और सीखेंगे भी. मैंने उनका कुछ लिट्रेचर पढ़ा है. वह काफी कुछ सिखाता है. आज की समस्याएं भी उसमें दिखती हैं.
छात्र दानिश ने बताया कि, कॉलेज प्रेमचंद के साहित्य को युवाओं तक पहुंचाने के प्रयास होने चाहिए। एक तो युवा आजकल काफी टफ  लैंग्वेज नहीं पढ़ सकते. इसलिए आसान प्रेमचंद के साहित्य को आसान शब्दों में कन्वर्ट करना चाहिए.
हर युग से जुड़ जाता है प्रेमचंद का सहित्य
प्रेमचंद का साहित्य ही कुछ इस तरह का है कि वह हर युग से जुड़ जाता है. उनकी कहानियां आज भी उतना ही सिखाती हैं जितना पहले सिखाती थीं. उनका साहित्य सामाजिक भी है और जीवन के करीब भी.
प्रोफेसर मंजू मेहता ने बताया कि, प्रेमचंद ने आज से कई दशक पहले अपने साहित्य में प्रतिभा को बढ़ावा दिया और आज अखबारों की सुर्खिया होता है कि इस गरीब के बच्चे ने आईएएस किया. प्रेमचंद का साहित्य कम्यूनल हामोनज़ी के करीब है.
मॉडल स्कूल के प्रिंसिपल एसके रैनीवालने बताया कि, उनके साहित्य से एक प्रेरणा मिलती है. आज भी उसका उतना ही उपयोग है. यही वजह है कि उन्हें भी अंग्रेजी राइटर शेक्सपियर का दर्जा दिया जाए. उन पर थिएटर हों, फिल्म बनें ताकि युवा कुछ सीखे.

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