क्या सवर्णों से पंगा ले रही है बीजेपी ?

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लगता है बीजेपी जिस डाली पर बैठी है उसी पर खुद कुल्हाड़ी मार रही हैं. दरअसल बीजेपी का मैन पावर या यूं कहें कि, सवर्ण सड़कों पर है जिसको लेकर बीजेपी सतर्क दिखाई दे रही है ये तो सही है लेकिन किसको लेकर सतर्क है ये थोड़ा सोचने पर मजबूर कर देगा. हाल ही में SC-STएक्ट को लेकर पूरे देश में सवर्णों का विरोध देखने को मिला.
”पर इंसानों के ये सारे झुरमुट, ना कुछ देते, बस लेते ही लेते। जिस डाल पर ये सब बैठे, उसी डाल को काटते रहते, वो पेड़काटते, फिर पेड़ ढूंढते, चूंकि उसको आराम चाहिए। पेड़ भी चाहिए, छांव भी चाहिए। ये झुरमुट अपनी बुद्धि लगाते, खुद नियम बनाते और तोड़ते”  (नोट-मेरी कविता,मेरा जरिया पुस्तक के कुुछ अंश)
‘ये कविता बीजेपी पर फिट बैठ रही है,जैसे किसी को एक अच्छी ड्रेस फिट लगती है वैसे ही’
सवर्ण समाज के लोगों ने गुरुवार को सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया. सबसे ज्यादा प्रभावित मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार, जिसमें मध्यप्रदेश और राजस्थान में साल के अंत में चुनाव रोमांचक मूड में है. इस ट्वेंटी-ट्वेंटी के बाद आपको लग रहा होगा की बीजेपी सवर्ण समाज के बारें में या फेवर में कोई फैसला लेगी और कुछ न कुछ इस बारे में जरुर निर्णय लेगी. या फिर मान लीजिये सोचेगी जरुर. लेकिन ऐसा नहीं है बीजेपी ने इस सोच से उलट SC-ST  समाज के 2 हजार से 5 हजार लोगों का सम्मेलन करने जा रही है. जिससे सवर्ण वोटों की भरपाई हो सकें.

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जो सम्मेलन बीजेपी आयोजित करने जा रही है उसमें मोदी सरकार और बीजेपी शासित राज्य अनुसूचित जाति-जनजाति समाज के लोगों के लिए कामों का ब्यौरा देंगे. इसमें राष्ट्रपति, राज्यपाल, राज्यसभा सांसद, केंद्र और राज्य सरकार में मंत्री पद, केंद्र से लेकर राज्यों तक में संगठन में बड़े पद और कई संवैधानिक पदों नियुक्तियां के बारें में भी बताएंगे . सबसे पहले उत्तर प्रदेश में इन सम्मेलनों की शुरुआत की जाएगी.
इस पर सवर्ण संगठनों का कहना है कि, बीजेपी ने सोचने पर मजबूर कर दिया है कि इस बारें में जरुरी कदम उठाए?. उनका कहना है कि भारत बंद से बीजेपी सहित तमाम विपक्षी पार्टियां इस बारे में कदम उठाती लेकिन ऐसा नहीं हुआ है. बल्कि इसके उलट परिणाम आना काफी गंभीर है. साथ ही इस फैसले का सीधा असर पड़ेगा और लोग सोचने पर मजबूर हो जाएगे, इससे बीजेपी के लिए विकट स्थिति निर्मित हो सकती है.
वहीं लोगों का कहना है कि सवर्ण आंदोलन के बाद बीजेपी सवर्णों के सपोर्ट में नहीं आती है तो बीजेपी संकट में आ सकती है अब लोग बीजेपी को सवर्ण विरोधी पार्टी करार दे सकते हैं. इससे लगता है कि बीजेपी ने सवर्णों को ठेंगा दिखाया है और इसका जबाव आने वाले दिनों में दिया जाएगा.

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