वैसे तो चीन आधिकारिक तौर पर एक नास्तिक देश है लेकिन चीन का संविधान किसी भी धर्म का पालन करने की आजादी देता है हालांकि पिछले 40 सालों में यहां धार्मिक गतिविधियां बढ़ी हैं. लेकिन इसके बावजूद चीन में धर्म के रास्ते में कई पाबंदियां आई हैं. वहीं चीन की सरकार अब अपने देश में इस्लाम को जड़ से खत्म करने के लिए काम कर रही है. चीन में बना मुसलमानों के अस्तित्व पर खतरा पाकिस्तान के लिए मुसीबत खड़ी कर रहा है. क्योंकि चीन और पाकिस्तान की घनिष्ठता देखते ही बनती है. जिस तरह से चीन पाक का सपोर्ट करता है और पाकिस्तान भी चीन के प्रति उदारता दिखाता है. पाकिस्तान एक मुस्लिम राष्ट्र है. और चीन की कारगुजारियों को देखते हुए लगता है कि चीन को मुसलमान फूटी आंख नहीं सुहा रहे है. वहीं पाकिस्तान को केवल चीन का ही सहारा है. या यूं कहे की पाकिस्तान केवल चीन की दम पर उचकता है. और कही ना कही चीन को भी पाकिस्तान की कई हरकतें पसंद नहीं है. वह केवल चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर के लिए फंसे अपने 63 बिलियन डॉलर समय समय पर कढ़वा घूट पीता रहता है. हालांकि इस सीपीईसी की कछुआ रफ्तार कभी भी यहां संघर्ष का विषय बन सकती है. वहीं जब चीन ने कथित तौर मुसलमानों की नस्ल के सफाये की कवायद जोर शोर से शुरू दी है. ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब यह आग पाकिस्तान तक पहुंच कर वहां की आवाम को झुलसा दे. और चीन की ये कारगुजारी साफ कह रही है कि, चीन पाकिस्तान का सच्चा सौदागर,दोस्त,भाई और साथ नहीं है. ये सिर्फ दिखावा और अपने हित साधने के लिए पाकिस्तान का सपोर्ट करता है. चीन में अब मुस्लिम बच्चों को धर्म और इस्लामिक शिक्षा से दूर रहने की हिदायत दी जा रही है चीन के  शिंजियांग प्रांत में जो भी उईगर समुदाय के मुस्लिम बहुसंख्यक हैं. उनके खिलाफ पहले से ही चीनी अथॉरिटी ने कई प्रतिबंध लगाए हुए है. और यहां मौजूद लिटिल मक्का में 16 साल से कम उम्र के बच्चों को नमाज और इस्लामिक शिक्षा से दूर रहने के लिए कहा गया है. इन बच्चों के लिए धर्मनिरपेक्ष सिलेबस बनाने को कहा गया है. सरकार का मानना है कि धार्मिक आस्था से वामपंथ की विचारधारा कमजोर होती है. और तो और पार्टी के सदस्यों को भी मार्क्सवादी नास्तिक बनने को कहा जाता है.

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