दानवेंद्र सिंह तोमर | वर्तमान समय में अक्सर य़े प्रश्न उठता है कि, धार्मिक कार्य करते समय मष्तिक के बीचों बीच तिलक लगाने से एक अलग की चेतना उत्पन्न होती है. हिंदू धर्म में मष्तिक पर तिलक लगाने का एक विशेष महत्व है.
शास्त्रों में ऐसा माना जाता है कि, पल्कों के मध्य एक आज्ञा चक्र होता है जो हमारा चेतना केंद्र भी होता है. उक्त जगह पर तिलक लगाने से शांति और शीतलता बनी रहती है. इसी कारण मष्तिक के बीचों बीच तिलक लगाया जाता है. इससे दिमाग में सैटाटोनिन और बीटाएंडार्पिन जैसे रसायनों का संतुलन बना रहता है साथ ही मेघा शक्ति में वृद्धि होती है. वहीं तिलक लगवाते समय सिर पर हाथ इसलिए रखते हैं कि, सकारात्मक ऊर्जा शीर्ष पर एकत्रित हो और हमारे विचार सकारात्मक हो सके.
तिलक लगाने का एक और कारण है चूंकि माथा चेहरे का केंद्रिय भाग होता है जहां सबकी नजर होती है. उसके मध्य में तिलक लगाने से महिलाओं में देखने वाले की दृष्टि में बांधने का काम करता है. महिलाएं कुमकुम का तिलक लगाती है जो कि, उनके सौंदर्य को बढ़ाता है.
पूजा के समय भगवान को स्नान कराने के बाद चंदन का तिलक लगाया जाता है. इसका गुण शीतलता देने वाला होता है. और इसकी सुगंध सकारात्मक ऊर्जा देने वाली होती है. प्रमुख रुप से भारत और नेपाल के अलावा किसी भी देश में यह प्रथा नहीं है. भारतीय संस्कृति में यह परम्परा कई प्राचीन काल से चली आ रही है. तिलक एक नहीं बल्कि 80 प्रकार से लगाया जाता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here