अपरिचित लोगों की नि:स्वार्थ भाव से मदद करने या उनके साथ अपनी चीजें साझा करने से किशोरों के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. एक शोध में यह बात सामने आई है. अमेरिका की ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी (बीवाईयू) के वैज्ञानिकों ने पाया कि यह बात उन लोगों पर लागू नहीं होती है जो सिर्फ अपने दोस्तों या परिजन की मदद करते हैं.
बीवाईयू की प्रोफेसर लॉरा पडिला-वाकर का कहना है कि, ‘ यह अध्ययन हमें इस चीज को समझने में मदद करता है कि जो किशोर अपरिचित लोगों की मदद करते हैं, वे कुछ समय बाद खुद को लेकर बेहतर महसूस करते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘केवल रिश्तेदारों या दोस्तों की मदद करने की तुलना में अपरिचितों की मदद करने का व्यक्ति की नैतिक पहचान या स्वयं को लेकर उसकी सोच पर अधिक उल्लेखनीय प्रभाव पड़ता है.’
वहीं एक नए शोध में सामने आया है कि ध्यान और श्वास से जुड़े व्यायाम जैसे प्राणायाम दिमाग को मज़बूत बनाने और कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने में मददगार साबित होता है. डबलिन के त्रिनिटी कॉलेज के प्रमुख शोधकर्ता इयॉन रॉबर्टसन के मुताबिक शोध से पता चला है कि श्वास केंद्रित व्यायाम और दिमाग की स्थिरता के बीच मज़बूत संबंध है.
शोध से पता चलता है कि सांस लेना ध्यान का एक प्रमुख तत्व और दिमागी व्यायाम है. ये सीधे तौर पर दिमाग में प्राकृतिक रासायनिक संदेशवाहक के स्तर को प्रभावित करता है, जिसे नॉरएड्रीलीन कहते हैं. ये रासायनिक संदेशवाहक हमारे चुनौती, उत्सुकता, व्यायाम, ध्यान केंद्रित या भावनात्मक रूप से उत्तेजित होने पर जारी होते हैं. अगर ये सही स्तर पर उत्पन्न होते हैं तो ये दिमाग को नए संपर्क बनाने में मदद करते हैं. ये दिमाग के लिए टॉनिक के तौर पर काम करता है.

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