‘ना भीम के ना भारत के सगे हिंसक आंदोलनकारियों’

'हिंसा कर बाबा साहब के नाम को बदनाम मत करो'

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“जय भीम…जय भारत,
पर तुम ना तो भीम के सगे हो और ना ही भीम के भारत के। तुम तो केवल राजनीति के बनाये हुए वो प्यादे बन चुके हो जिसने बाबा साहब के नाम की आड़ लेकर भारत को हिंसा की आग में झोंक दिया।

जिस बाबा साहब ने बौद्ध धर्म अपना कर शांति और अहिंसा का पाठ पूरे भारत को सिखाया उसी भीम के रास्ते पर चलने का ढोंग करने वाले ढोंगी आज तुम सड़कों पर उतर कर बेगुनाहों का खून बहा रहे हो!

तुमने भारत के संविधान का घोर अपमान किया है.. और तुम्हारी ये अराजकता तुम्हे कहीं का नहीं छोड़ेगी। सवर्णों और दलितों की जिस खाई को तुमने और गहरा कर दिया है उसी खाई में तुम खुद एक दिन समा जाओगे।
मैं खुद बौद्ध धर्म से हूँ और बाबा साहब के विचारों को मानने वाला हूँ… इसलिए मुझ पर तुम्हारी जातिवाद की टिप्पणियों के बाण नही काम कर पाएंगे।

बाबा साहब ने दलितों को उनका हक दिलाने के लिए हथियार नही उठाये और न कभी किसी को उठाने दिए। उन्होंने हमेशा कहा कि देश सर्वोपरि है और उसके बाद है धर्म और जाति। इस देश से बड़ा कुछ भी नहीं। लेकिन अब राजनीति के लिए तुमने देश को तोड़ने का काम किया है।

तुम कभी सच्चे भीम सेनानी हो ही नही सकते क्योंकि भीम की सेना हथियार नहीं… किताबें उठाती हैं।

मैं मानता हूं कि आज भी देश मे कई ऐसे शहर और गाँव है जहाँ दलितों को अब भी उनका हक नहीं मिलता, उन्हें किसी न किसी तरह से प्रताड़ित किया जाता है लेकिन उसके खिलाफ आवाज़ उठाने की बजाय ये सड़कों पर तमाशा करना बहुत गलत है।

अगर हिम्मत है तो उनके हक की लड़ाई लड़ने में उनका साथ दो , उनकी आवाज़ बनों , भारत के संविधान पर भरोसा रखो …पर इस तरह हिंसा कर बाबा साहब के नाम को बदनाम मत करो।”

– नीरज वंजारी की फेसबुक पोस्ट से

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