नियम और शर्तों वाली कर्जमाफी ने ली 2 किसानों की जान !

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भोपाल| मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आते ही किसानों से किया वादा पूरा किया. शपथ ग्रहण करते ही सीएम कमलनाथ ने कर्जमाफी की फाइल पर साइन किए और खूब वाहवाही लूटी. और इस उद्देश्य के साथ की पिछली सरकार में जो किसान कर्ज के चलते आत्महत्या कर रहे थे, इस तरह की घटनाओं से लगाम लगेगा.
लेकिन इसके बावजूद प्रदेश में मंत्रियो के शपथ ग्रहण से पहले ही इस कर्ज माफी पर ग्रहण लग गया. जहां खंडवा और कालापीपल में 2 किसान ने आत्महत्या कर ली. वजह निकलकर सामने आई कर्ज ! दरअसल खंडवा के 45 साल के जौन सिंह इस बात से बेहद निराश थे कि उनका नाम कर्ज माफी की लिस्ट में नहीं था. ऐसी ही कहानी कालापीपल के किसान की है जहां उसने जहर खाकर आत्महत्या कर ली.
अब सोचने वाली बात ये है कि, क्यों उनका नाम कर्ज माफी में नहीं था. कर्जमाफी के ऐलान में केवल उन किसानों के लोन ही माफ होने थे जो 31 मार्च 2018 तक लिए गए हैं. उसके बाद किसी का भी लोन माफ नहीं होना था. इन T/C में किसान जौन सिंह नहीं आता था. सरकारी आदेश के मुताबिक कर्ज माफी 35 लाख किसानों की मदद करने वाली थी, जिन्होंने 2 लाख तक का लोन राष्ट्रीय या को-ऑपरेटिव बैंकों से लिया था.
कांग्रेस सरकार की कर्जमाफी उसी तरह से जैसै किसी विज्ञापन के आखिर में बोला जाता है ‘नियम औऱ शर्तें लागू’. और कर्ज माफी सेवा शर्ते इस प्रकार हैं जिन्होंने शॉर्ट टर्म लोन लिया था. यानी सिर्फ फसल के लिए. वो किसान जिन्होंने खेती के उपकरण खरीदने के लिए, किसी सिंचाई यंत्र को लगाने के लिए, गाय या बैल खरीदने के लिए लोन लिया था उन्हें ये नहीं मिलता. जो भी किसान खेती के लिए कर्ज लेते हैं वो अक्सर फसल के लगाने के पहले लेते हैं. मार्च के बाद आए खेती के सीजन में कई किसानों ने इसलिए लोन लिया होगा ताकि वो सर्दियों के लिए फसल लगा सकें. ऐसे में उन किसानों को फायदा नहीं मिलेगा. और कर्ज माफी से कई वंछित रह जाएंगे.
जिन किसानों से वादा करके कांग्रेस सरकार सत्ता में आई अब उन किसानों के लिए कर्ज माफी की ये शर्तें बेहद निराशाजनक हैं. अब कर्ज माफी का वादा पूरा करने के कुछ ही दिनों में जहां किसान आत्महत्या का सिलसिला शुरू हो गया है तो ये कहना गलत नहीं होगा कि कमलनाथ सरकार के लिए जो सबसे बड़ी चुनौती है वो अभी भी बाकी है.

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