पत्रकारिता ही एक ऐसा क्षेत्र है जो चुनौतियों की बात करता है, राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर बोले पत्रकार

भोपाल। पत्रकारिता की चुनौतियां एवं समाधान विषय भोपाल में राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। युवा पत्रकार संघ द्वारा आयोजित इस परिचर्चा में मध्यप्रदेश की प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के वरिष्ठ एवं युवा पत्रकारों ने इस परिचर्चा में भाग लिया। वरिष्ठ पत्रकार शरद द्विवेदी ने इस मौके पर कहा कि पत्रकारिता का ही क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है जो आज भी चुनौतियों की बात करता है। भले ही अर्थवादी व्यवस्था में कोलगेट बनाना और समाचार पत्र निकालना एक जैसा हो गया हो लेकिन हमें इसके लिए समाधान तलाशना होगा। उन्होनें कहा है पिछले कुछ दशकों से पत्रकारिता पर हमले तेज हुए है। पत्रकारों की विश्वासनीयता को संकट में डाला जा रहा है। हमें एक होना होगा, हमें एक जुटता की जरूरत है। उन्होनें इस मौके पर वकीलों और पुलिसकर्मीयों का उदाहरण दिया। वही उन्होनें कहा कि अगर पत्रकार एकजुट हो जाएगें तो क्रांति हो जाएगी। एक पत्रकार बालीबुड स्टार की तरह होता है, जिसकी छवि यथार्थ से जायदा ताकतबर होती है।

इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार और संपादक मृगेन्द्र सिंह ने युवा पत्रकारों को नसीहत देते हुए कहा कि हम ब्रेकिंग न्यूज के चक्कर में विश्वासनीयता खत्म कर रहे है। अपने अंदर विश्वास पैदा कीजिए यह विश्वास आपको पढ़ने की आदत डालने और मेहनत करने से आएगा। जबकि रोजगार और निर्माण के संपादक प्रोफेसर पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने इस पत्रकारिता के इतिहास पर परिचर्चा के दौरान कहा कि इतिहास अपने आप को दोहराता है। पत्रकारिता में चुनौतियां जरूर बढी है पर इस चुनौतियों से पार बाने का समाधान एक ही है धैर्य और अपनी जिम्मेदारी का सही से निर्वहन करना। पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने कहा कि खबर में एक लाइन का ही खेल होता है उस एक लाइन को लिखने से आपको किसने रोका है।

वरिष्ठ पत्रकार और संपादक विजय दास ने अपने चार दशकों के पत्रकारिता जीवन की सीख को पत्रकारों से साझा करते हुए कहा कि जो गलत दिखता है, वह लिखना पड़ेगा ताकि वह सुधर जाए। पत्रकारों के आदर्श नारद के नाम का एक ही अर्थ है जिसकी बात को कोई रद्द न कर सके वही नारद है। राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर युवा पत्रकार आदित्य श्रीवास्तव ने वर्तमान पत्रकारिता की चुनौतियों पर कहा कि बाइट और टिक टैक तक ही हमारी पत्रकारिता क्यों सीमित हो गई है। जबकि हमें कुछ नया तलाशने की जरूरत है। जबकि पत्रकार शशिकांत त्रिवेदी ने पत्रकारिता के आर्थिक पहलूओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अखबार जल्दबाजी में निकाला गया इतिहास है। पत्रकारिता में कोई बिक नहीं रहा बल्कि हम ऐसा प्लेटफार्म तैयार नहीं कर पा रहे जिसे लोग खरीद कर पढे रिसर्च की जरूरत है। तो दूसरी ओर वेब और सोशल मीडिया पर प्रकाश डालते हुए पत्रकार सरमन नगेले ने बताया कि सोशल मीडिया ने गेट कीपर की भूमिका को स्थान दिया है, विज्ञापन तो सभी जानने लगे है पर सेल्फ रेग्यूलेशन की जारूरत आज जायदा है।

सरकार लेगी बच्चों के एज्यूकेशन की जिम्मेदारी

राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस के मौके पर युवा पत्रकार संघ के परिचर्चा में पहुँचे मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने भी पत्रकारों के कठिन परिश्रम पर अपनी बात रखे हुए कहा कि प्रदेश की कमलनाथ सरकार आने वाले दिनों में पत्रकारों के लिए ऐसी योजनाएं लाने जा रही है जिससे उनके आर्थिक और सामाजिक जीवन में बदलाव आएगा। साथ ही मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में पत्रकारों के लिए जो वादे किए थे वह उसके लिए वचनबद्ध है चाहे फिर पत्रकार प्रोटेक्शन एक्ट का मामला हो या फिर पत्रकारों के साथ हुई दुर्घटना के बाद बच्चों के एज्यूकेशन की जिम्मेदारी को लेकर दिया गया वचन हो। मंत्री पीसी शर्मा ने इस मौके पर पत्रकारों को भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री कमलनाथ की पत्रकारों के लिए साकारात्मक सोच है जिसके निर्देशों का पालन वह कर रहे है। राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर आयोजित युवा पत्रकार संघ की इस परिचर्चा में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति दीपक तिवारी भी शामिल हुए। युवा पत्रकार संघ के सचिव दिनेश शुक्ल ने इस मौके पर उपस्थित सभी वरिष्ठ और युवा पत्रकारों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर युवा पत्रकार संघ के अध्यक्ष ह्रदेश धारवार, उपाध्यक्ष सुमित शर्मा, कोषाध्यक्ष पंकज द्विवेदी और कार्यकारिणी सदस्य दीपक राय, सुयश भट्ट सहित संघ से जुडे सदस्य शामिल हुए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here