पाक जनता को भी नहीं चाहिए कश्मीर !

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पाकिस्तान में 25 जुलाई को होने वाले चुनावों में वहां की अवाम कश्मीर से ज्यादा शिक्षा-विकास चाहती है. यही वजह है कि, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ, पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टीओं ने अपने घोषणा पत्रों में आर्थिक मुद्दों को शामिल किया है.पाकिस्तान के पूर्व पत्रकार कमर आगा ने कहा कि, कश्मीर का मुद्दा अचानक खत्म होने की असली वजह यहां की अवाम है.और अब वह देश के दूसरे बड़े मुद्दों शिक्षा और गरीबी पर बात करना चाहती है.
पाकिस्तान के युवा अपने अधिकारों और विकास के मुद्दे पर वोट देने के लिए तैयार हैं.जनता का कहना है कि, कश्मीर अगर पाकिस्तान में आ भी गया तो हमें क्या फायदा होगा?.लोगों का मानना है कि, कश्मीर सेना के लिए ‘जन्नत’ होगा, लेकिन हमें इसकी कोई जरूरत नहीं है.वहां की जनता अपने नेताओं को बार-बार भारत की तरक्की दिखाती है और पूछती है, जीतने के बाद हमारे लिए क्या करोगे?.वहीं पाकिस्तान चुनाव में आईएसआई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है.जहां कार्यालय के बाहर भारी संख्या में लोगों ने आईएसआई मुर्दाबाद के नारे भी लगाए.
दरअसल,कई खबरों में दावा किया गया है कि इस साल भी देश के आम चुनावों में खुफिया एजेंसी आईएसआई का दखल है.एक दिन पहले ही इस्लामाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस शौकत सिद्दीकी ने आईएसआई पर न्यायिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया था.उनका कहना था कि खुफिया एजेंसी देश के चीफ जस्टिस समेत कई अन्य जजों पर अपने अनुकूल फैसले देने का दबाव बना रही है.

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