विशाल रजक । एक तरफ भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने की बात की जा रही है. वहीं दूसरी तरफ शिक्षक ही अपने विद्यार्थियों से रिश्वत मांग कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं.
एक ऐसा ही वीडियो वायरल हुआ है जिसमे एक स्कूल की प्रिंसिपल अपने विद्यार्थी से 10 हजार रुपये की रिश्वत मांग रही है दमोह जिले के तेंदूखेड़ा गुरुकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की है. विद्यार्थी ने इसकी लिखित शिकायत थाने में और कलेक्टर से की है. इस स्कूल के विद्यार्थी धर्मराज अहिरवार ने 12वीं बोर्ड की परीक्षा 75.2 प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण की है. विद्यार्थी को मुख्यमंत्री मेघावी योजना के तहत शासन से 25 हजार रुपये का स्कालरशिप मिली है.
विद्यार्थी धर्मराज ने बताया कि वह स्कूल अपना स्थानांतरण प्रमाण पत्र और अंक सूची लेने पहुंचा तो प्रिंसिपल ने स्कूल की 16000 रुपये फीस और 10000 रुपए रिश्वत के मांगे. विद्यार्थी के मुताबिक प्रिंसिपल ने कहा कि जब तक 16000 रुपये फीस और 10 हजार रुपएअलग से नहीं दिए तो अंकसूची और स्थानांतरण प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा.
विद्यार्थी ने इसकी लिखित शिकायत तेंदूखेड़ा थाने में और दमोह कलेक्टर को भी की है.मुख्यमंत्री मेघावी छात्र योजना की राशि विद्यार्थियों को 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर दी जाती है, ताकि विद्यार्थी आगे की पढ़ाई और अच्छे से कर पाए. छात्र ने प्रिंसिपल से बात-चीत का वीडियो बना लिया. जिसमे प्रिंसिपल स्पष्ट कह रही हैं कि 10 हजार रूपए समझ लो ऐश करने के लिए मांग रही हूं. वहीं स्कूल प्रिंसिपल सुधा त्रिपाठी का कहना था कि उसने विद्यार्थी से कोई रिश्वत की मांग नहीं की है. वह सिर्फ स्कूल की बकाया फीस मांग रही थी.

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