फ्रेंच को भूल, अब भोपालियांस स्पेनिश और जर्मन बोल रहें

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भोपाल। महज दो साल पहले तक अंग्रेजी के बाद विदेशी भाषा के नाम पर ज्यादातर लोग फ्रेंच ही सीखना चाहते थे, मगर वैश्विक स्तर पर हो रहें बदलावों के चलते विदेशी भाषाओं के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बदल रहा है। फेवरेट लिस्ट में अब भी अंग्रेजी के बाद फ्रेंच का ही नंबर है, मगर अब उसे जर्मन और स्पेनिश जैसी भाषाओं से कड़ी टक्कर मिल रही है। इन दोनों भाषाओं को सीखने वाले स्टूडेंट्स की संख्या महज दो साल में ही दोगुनी हो गई है। रूसी भाषा भी उन्हें आकर्षित कर रही है।
एक्सपटर्स के मुताबिक विदेशी भाषाएं सीखने वालों में सबसे बड़ी संख्या उन लोगों की हैं, जो फॉरेन क्लाइंट्स से बेहतर ढंग से डील करने के लिए उनकी लैंग्वेज सीखना चाहते हैं। दूसरे नंबर पर वो स्टूडेंट्स हैं, जो उन देशों में हायर स्टडी के लिए जाना चाहते हैं। इसके अलावा विदेशों में फ्यूचर बनाने वाले और नई लैंग्वेज सीखकर अपना ज्ञान बढ़ाने की मंशा रखने वाले भोपाली भी बड़ी संख्या में विदेशी भाषाएं सीखना चाह रहे हैं।

सिलिकॉन वैली में प्रचलित है स्पेनिश
फॉरेन लैंग्वेज एक्सपर्ट रीता कहती हैं कि अमेरिका सिलिकॉन सिटी का बड़ा हिस्सा उत्तरी अमेरिका में आता है, जहां स्पेनिश भाषा प्रमुखता से बोली जाती है। ऐसे में सॉफ्टवेयर बिजनेस से जुड़े प्रोफेशनल्स को अंग्रेजी के बजाय स्पेनिश में बात करने से डील फाइनल करने में अधिक आसानी होती है। इसके अलावा स्पेनिश सीखने से स्पेन और उसके आसपास के देशों में भी जॉब और बिजनेस की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। उत्तरी अमेरिका में रह चुकी रुचि गुप्ता कहती हैं कि उस क्षेत्र में स्पेनिश भाषा का जबरदस्त क्रेज है। पहले हमारे यहां की कंपनियों को इस सच्चाई के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी, मगर जैसे-जैसे लोग इस हकीकत से वाकिफ हो रहे हैं स्पेनिश के प्रति लोगों की जागरुकता और जिज्ञासा दोनों बढ़ रही हैं।

फॉरेन में पढ़ाई का खर्च आधा कर देती है जर्मन भाषा
जहां सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री से जुड़े लोग स्पेनिश सीख रहे हैं, वहीं मैकेनिकल और ऑटोमोबाइल वाले स्पेनिश के बजाय जर्मन और जापानी भाषाओं को तरजीह दे रहे हैं। जर्मन भाषा की बढ़ती लोक प्रियता की एक वजह ये भी है कि जर्मनी में अमेरिका के मुकाबले पढ़ाई काफी सस्ती है। वहां इंटरनेशनल लेवल पर सिलेक्टेड स्टूडेंट्स की ट्यूशन फीस बहुत कम कर दी जाती है। कई मामलों में तो पूरी तरह खत्म कर दिया जाता है। जिससे अमेरिका के मुकाबले वहां अलग-अलग कोर्सों की कुल फीस लगभग आधी ही रह जाती है, इसलिए जर्मन भाषा की डिमांड बढ़ रही है।

जर्मन का संस्कृत है गहरा नाता
जर्मन क्लासेस की सुमन के मुताबिक जर्मन से संस्कृत का गहरा नाता है, क्योंकि उसमें संस्कृत भाषा के कई शब्द जस के तस इस्तेमाल किए जाते है वहां भारतीय वेद-पुराणों पर हो रहे शोध के लिए भी बड़ी संख्या में दुभाषियों की जरूरत है, इसलिए जर्मन सीखने वालों की तादात में खासी तेजी से इजाफा हो रहा है।

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