भज्जू श्याम का ‘मन की बात’ में जिक्र, गोंड आर्ट में है महारत हासिल

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भज्जू श्याम
भज्जू श्याम

[bhopaltoday] पीएम मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में जबलपुर के भज्जू श्याम की पेंटिंग्स का जिक्र किया है. ‘मन की बात’ में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि, भज्जू श्याम ने पूरे विश्व में देश का नाम रोशन किया है. आपको बता दे कि, भज्जू श्याम को पेंटिग्स के लिए इस साल पद्म पुरस्कार भी दिया गया है.

भज्जू श्याम जबलपुर के एक छोटे से गांव पाटनगढ़ के निवासी हैं. भज्जू श्याम का बचपन आदिवासी अंचल में गुजरा जहां उनके माता-पिता की आर्थिक हालत ऐसी नहीं थी कि, वह अपने बच्चों की छोटी से छोटी ख्वाहिश भी पूरी कर सके. तमाम कोशिशों के बावजूद परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं आया तो भज्जू श्याम ने अपना घर घर छोड़ दिया.

भज्जू श्याम ने पहले नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक की राह पकड़ी. यहां कुछ दिन पौधे लगाने का काम किया. इसके बाद उन्होंने भोपाल का रुख कर लिया. यहां उन्होंने सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की. फिर कुछ दिन इलैक्ट्रिशियन का काम भी किया.

भज्जू यूं तो पेंटिग्स में माहिर नहीं थे, लेकिन कहते है अभ्यास करने से सबकुछ हासिल किया जा सकता है. ऐसा ही कुछ भज्जू श्याम ने किया और उनका सहयोग दिया उनके चाचा ने. चाचा ने जब कूची पकड़ाई तो फिर जिंदगी को एक नयी राह मिल गई.

चाचा के सहयोग से भज्जू श्याम का हुनर धीरे-धीरे निखरने लगा. और कुछ दिनों में वह एक लाजवाब आर्टिस्ट बनकर उभरे. अब सफलता भी उनके कदम चूमने लगी थी. वहीं वह मौका भी आया जब भज्जू को सफलता मिली. दिल्ली में आयोजित एक प्रदर्शनी में उनकी पांच पेंटिंग बिकी, जिसमें उन्हें 1200 रुपए की राशि मिली.

भज्जू 2001 में लंदन गए तो दुनिया के इस खूबसूरत शहर से उनका दिल लग गया. लंदन से आने के बाद भज्जू ने करीब आठ किताबों का संपादन किया और सैकड़ों की संख्या में चित्र बनाए. भज्जू श्याम की किताब ‘लंदन जंगल बुक’ दुनिया की पांच विदेशी भाषाओं में पब्लिश हुई है.

वहीं लंदन के मशहूर रेस्‍टोरेंट ‘मसाला जोन’ के मालिक तो भज्जू की पेंटिंग से इतने प्रभावित हुए की उन्होंने अपने रेस्‍टोरेंट में पेंटिंग बनाने के लिए उन्हें लंदन तक बुला लिया.

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