महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन , राष्ट्रपति शासन से सम्वन्धित महत्वपूर्ण प्रश्न

महाराष्ट्र में 12 नवंबर 2019 को राष्ट्रपति शासन लागू हो गया. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की सिफारिश और केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया है.

भारत के अलग-अलग राज्यों में अब तक लगभग 125 बार राष्ट्रपति शासन लग चुका है. जबकि महाराष्ट्र में अब से पहले तक तीन बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था.

क्या है राष्ट्रपति शासन –

राष्ट्रपति शासन (या केन्द्रीय शासन) भारत में शासन के संदर्भ में उस समय प्रयोग किया जाने वाला एक पारिभाषिक शब्द है, जब किसी राज्य सरकार को भंग या निलंबित कर दिया जाता है और राज्य प्रत्यक्ष संघीय शासन के अधीन आ जाता है।

कब लगाया जाता है –

-राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता या संविधान के स्पष्ट उल्लंघन की दशा में

-जब राज्य विधानसभा में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं हो।

किस अनुच्छेद के अनुसार लगाया जाता है –

  • अनुच्छेद – 356

कौन लगाता है –

राज्यपाल की सिफारिश पर राष्ट्रपति !

संसद से अनुमोदन कितने महीनों में –

2 महीनों में

अधिकतम कितने महीने तक रह सकता है !

  • एक बार मे 6 महीने

अनुच्छेद 356 या राष्ट्रपति शासन का पहली बार प्रयोग कहाँ किया गया था ?

अनुच्छेद को पहली बार 31 जुलाई1957 को विमोचन समारम के दौरान लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गयी केरल की कम्युनिस्ट सरकार बर्खास्त करने के लिए किया गया था

क्या यह राष्ट्रपति का विवेकाधीन अधिकार है –

हाँ , जब किसी भी दल को पूर्ण बहुमत प्राप्त न हो !

इसे राष्ट्रपति शासन क्यों कहा जाता है ?

इसे राष्ट्रपति शासन इसलिए कहा जाता है क्योंकि, इसके द्वारा राज्य का नियंत्रण बजाय एक निर्वाचित मुख्यमंत्री के, सीधे भारत के राष्ट्रपति के अधीन आ जाता है, लेकिन प्रशासनिक दृष्टि से राज्य के राज्यपाल को केंद्रीय सरकार द्वारा कार्यकारी अधिकार प्रदान किये जाते हैं

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