मोदी की चीन यात्रा से इन मुद्दों पर बन सकती है बात

वुहान के खूबसूरत शहर में होगा स्वागत

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पीएम नरेंद्र मोदी तीन दिन की यात्रा पर चीन पहुंच चुके हैं. जहां पीएम मोदी शुक्रवार और शनिवार को वुहान के खूबसुरत शहर में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत करेंगे. इस वार्ता की खास बात आपसी समझ-बूझ को बढ़ाना है. इससे पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा था कि, मोदी और जिनपिंग की वार्ता भारत और चीन के संबंधों में ऐतिहासिक सिद्ध होगी. साथ ही इस बैठक का कोई एजेंडा पहले से तय नहीं है.2014 में सत्ता में आने के बाद से मोदी की यह चौथी चीन यात्रा है.

वहीं बैठक दोनों देशों के साथ ही दुनियाभर में आ रहे बदलावों के परिप्रेक्ष में भारत और चीन के बीच संबंध विश्व  में शांति, सुरक्षा और स्थारयित्वं की दृष्टि से महत्वऔपूर्ण हैं. जिससे मोदी और जिनपिंग के बीच हो रही इस मुलाकात के परिणाम स्वनरूप दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों के एक नये अध्यानय की शुरूआत होगी.

चीन रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा था कि, वह चीन के वुहान की यात्रा पर जा रहा हैं, जहां 27-28 अप्रैल को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अनौपचारिक शिखर बैठक होगी. उन्होंने कहा कि, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और वह द्विपक्षीय और वैश्विक महत्व के विविध विषयों पर व्यापक चर्चा करेंगे और विचारों का आदान प्रदान करेंगे. मोदी ने कहा कि इसमंव भारत-चीन संबंधों के सामरिक और दीर्घकालिक पहलुओं के संदर्भ में समीक्षा की जाएगी.

इन मुद्दों पर बन सकती है बात

मोदी और जिनपिंग की बैठक में सीमा विवाद पर भी चर्चा हो सकती है. दोनों नेता डोकलाम विवाद को लेकर भी चर्चा कर सकते हैं. बता दें, चीन की ओर से डोकलाम में सड़क निर्माण की कोशिशों के बीच ये विवाद जारी हुआ था. वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा. मीटिंग में दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर भी चर्चा हो सकती है. आपको बता दें कि, मोदी की चीन यात्रा से पहले चीन ने भारत के व्यापार को लेकर बात की थी. जिसमें भारत के साथ बड़े स्तर पर व्यापार होने की बात कही थी. इसी व्यापारिक असंतुलन पर दोनों देशों के नेता चर्चा कर सकते हैं. भारत पाकिस्ताकन अधिकृत कश्मीर (POK) में चीन के दखल पर बात कर सकता है. चीन मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराने की भारत की कोशिशों में अड़ंगा लगाता रहा है. ऐसे में मोदी और जिंपिंग इस मुदद् पर भी बात सकते हैं. इसके अलावा भारत और चीन के बीच ब्रह्मपुत्र नदी पर हाइड्रोपावर परियोजना को लेकर भी चर्चा हो सकती है. सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, चीन की इस परियोजना को लेकर पर्यावरणीय चिन्ताएं भी बनी हुई है. इसके अलावा भी भारत की कई चिंताएं हैं जिसको लेकर दोनों देशों के बीच बात हो सकती है.

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