रवीश कुमार के नाम एंकर का खुला खत

0
127

”आदरणीय सर रवीश कुमार जी सादर नमस्कार
आज के ज़माने में खुला ख़त लिखने की परंपरा ख़त्म सी हो चली है लेकिन आप सोशल मीडिया पर इस परंपरा को बचायें हैं बहुत बार आप खुले ख़त लिखते है आपका एक फ़ोटो देखा तो श्रीमान मुझे भी खुला ख़त लिखने का मन हुआ आख़िर आपसे हम नई पीढ़ी को इतना तो सीख लेना ही चाहिए तो आपसे सीखते हुए पत्र लिख रहा हूँ और मुझे पूरा विश्वास है अगर भूले भटके आपने ये पत्र पढ़ भी लिया तो आप इसका जवाब नहीं दे पाएँगें
हाँ तो आदरणीय अब मैं इस तस्वीर की बात कर लेता हूँ वैसे आप पत्रकार हो लेकिन इस तस्वीर में क़तई पत्रकार नहीं लग रहे तस्वीर देख कर मुझ छोटे से एंकर को ये समझ आ रहा है कि आप यहाँ बॉडीगार्ड की तरह तैनात हैं हालाँकि आपकी बॉडी फ़िट है आप बॉडीगार्ड भी हो सकते हो और तो और बॉडीगार्ड जो खड़े हैं उनसे ज़्यादा लम्बे आप हो साथ ही उन बॉडीगार्ड से एक गुण आपमे ज्यादा भी है आप मायावती जी के भाषण की स्क्रिप्ट भी लिख सकते हो… ओहो मैं आपकी इस तस्वीर में इतना खो गया कि अपना परिचय देना ही भूल गया तो सबसे पहले मैं आपको अपना परिचय आपकी स्टाइल में देना चाहता हूँ…नमस्कार मैं सचिन श्रीवास्तव मीडिया का मज़दूर हूँ एंकर के तौर पर मज़दूरी करता हूँ… जैसे ही आप मुँह खोलते है तो सबको समझ आता है कि आप प्रगतिशील राज्य बिहार से हैं ठीक वैसे ही जब मेरे कर्कश कंठ से आवाज़ निकलती है तो सामने वाला बंदा समझ जाता है कि मैं ग्वालियर-चंबल संभाग का हूँ … ग्वालियर-चंबल संभाग से तो आप परिचित ही होंगे कि यहाँ के लोग जो बोलते हैं मुँह पर बोल देते हैं ठीक वैसे जैसे कि मैं पत्र में बिना बोले सब बोल रहा हूँ…हाँ तो आदरणीय तस्वीर पर बात चल रही थी तो तस्वीर में आप इतने हैंडसम दिख रहे है जितने तो आप स्टूडियो में नहीं दिखते लेकिन आप यहाँ ऐसे खड़े कर क्या रहें है वो समझ नहीं आया आप और आपके चमचे गोदी मीडिया शब्द का प्रयोग करते हैं लेकिन आप यहां तो ऐसे लग रहे हैं जैसे कि भंडारे की लाइन में खड़े हो…लेकिन यहीं पोज़ीशन में अगर दूसरे पत्रकार मोदी जी के पीछे खड़े होते तो दावे से कह रहा हूँ आप उस पत्रकार को भक्त बता कर एक खुला पत्र लिख देते …वैसे आपकी तारीफ़ में यूँ तो बहुत कुछ लिख सकता हूँ क्योकि आपके कारनामे है ही ऐसे लेकिन क्या है न नई पीढ़ी शार्ट एंड स्वीट पढ़ना पसंद करती है आपके द्वारा लिखे बड़े बड़े लेख की तरह मैं नहीं लिखूँगा बस श्रीमान इतना ही पूछूँगा इस तस्वीर में आपके इस तरह खड़े रहने के क्या मायने निकाले जाएँ”?

___छोटे शहर से आया एक छोटा सा निष्पक्ष एंकर_ सचिन श्रीवास्तव

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here