सलाखों के पीछे कैदी बने इंजीनियर, जेल में बदली कैदियों की तस्वीर

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[भोपाल] [Sanawer shafi] किसी कैदी ने जेल में रहकर एमबीए किया, तो किसी ने कम्प्यूटर का डिप्लोमा किया. इतना ही नहीं जेल के अंदर रहते हुए किसी ने बागवानी का हुनर सिखा, तो किसी ने अपनी कला को निखारकर नया मुकाम हासिल किया. वहीं भोपान जेल की चार दीवारों के बीच 14 साल रहते हुए कत्ल का कलंक लेकर पहुंचे रामकृष्ण ने सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री ली. अपने अच्छे आचरण के चलते इन कैदियों को 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर जेलों से रिहा किया गया. ये सभी कैदी हत्या के मामलों में सजा काट रहे थे. सरकार ने अच्छे आचरण के चलते छह साल की सजा इन कैदियों की माफ  कर दी. भोपाल से 15, ग्वालियर से 44, जबलपुर से 17 और इंदौर से 12 कैदी रिहा हुए हैं.

असम यूनिवर्सिटी से हासिल की सिविल इंजीनियर की डिग्री 

भोपाल सेंट्रल जेल से रिहा हुए रामकृष्ण कालू राम उन कैदियों में से एक है, जिन्होंने पढ़ाई का साथ नहीं छोड़ा. पेशे से शिक्षक रामकृष्ण ने गुस्से में आकर एक व्यक्ति का मर्डर कर दिया था. जेल में आने के बाद उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन तब तक देरी हो चुकी थी. उन्होंने एक शिक्षक होने के नाते अपनी पढ़ाई आगे जारी रखी और 14 साल की सजा के दौरान उसने असम यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री ली.

जेल में रहकर किया कम्प्यूटर ऑपरेटर का काम 

साथ ही रिहा हुए कई कैदियों ने कम्प्यूटर का डिप्लोमा किया है, तो कई कैदियों ने एमबीए या फिर दूसरी विषयों पर डिग्री हासिल की है. इतना ही नहीं, जिन्होंने पढ़ाई नहीं की, वो भी जेल के अंदर रहते हुए हुनरमंद बने है. रामकृष्ण जेल में रहकर कम्प्यूटर ऑपरेटिंग का काम करता था. रामकृष्ण ने बताया कि, अब वो खेती के साथ इंजीनियर के तौर पर नौकरी भी करेगा.

डबल मर्डर में काटे 20 साल, अब करेंगे खेती 

प्रकाश रेयकवार भी भोपाल सेंट्रल जेल से रिहा हुए हैं. प्रकाश का कहना है कि, उससे गलती से मर्डर हो गया था. उसने डबल मर्डर के केस में 20 साल की सजा काटी। अब वो जब बाहर आया है, तो परिवार के साथ खेती में मदद करेगा.

जेल में कई कैदी ऐसे आते हैं जो गुस्से में अपराध का देते है, लेकिन उन्हें जेल में आकर अपनी गलती का एहसास होता है और वह अपनी गलती सुधारने के लिए पढ़ाई का दामन थाम लेते हैं. ऐसे कैदियों की जेल प्रशासन भी मदद करता है और ऐसे ही कुछ जो कत्ल का कलंक लेकर आए थे और अब किसी ना किसी विषय में डिग्री और अपनी पंसदीदा कला में निपुण होकर आजाद हुए हैं.

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