होली पर दिख रहा GST का असर, जाने कैसे

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भोपाल |

1 जुलाई को देश में जीएसटी लागू हुआ था. इसका असर अब त्योहारों में माने जाने वाली होली के रंग पर भी इसका असर दिख रहा है. पिछले 40 साल से गुलाल और रंग पर कोई टैक्स नहीं लगता था. इस बार यह जीएसटी के दायरे में आ गए और करीब 18 प्रतिशत टैक्स लगा दिया गया है. तो पिचकारी पर 12 प्रतिशत जीएसटी भी जुड़ गया है जिसको लेकर दुकानदारों की मानें तो इस सीजन बाजार काफी मंदा दिखाई दे रहा है.

सादा रंग पहले एक किलो 950 रुपये का आता था और अब 1350 रुपए का आ रहा है. हर्बल नेचुरल फ्रूट कलर 15 ग्राम का 13.50 रुपए रेट था , अब 15.50 रुपए हो गया है. हर्बल गुलाल पचास ग्राम पहले 65 और अब 85 रूपए. दुकानदारों ने बताया कि, वह रंगों का काम पिछले करीब दस साल से कर रहे हैं मगर पहली बार हमने इस तरह से ठंडा मार्केट देखा है क्योंकि रंगों के दाम बड़े हैं

इसका सबसे बड़ा कारण जीएसटी है जिससे रंग तो मंहगे हुए ही हैं. और साथ ही बाजार भी करीब चालीस प्रतिशत गिरावट देखने को मिली है. व्यापारी ने बताया कि, अभी तक हमें टेक्स नहीं देना होता था यह पहली बार है जो हमें जीएसटी देना पड़ रहा है. हम दिल्ली से रंग लाते थे और यहां बेचते थे। मगर यह नहीं पता था कि पहली बार में ही इतना ज्याद टैक्स थोप दिया जाएगा. इसका असर छोटे व्यापारियों पर देखने को मिल रहा है. रंग व्यापारी का कहना है कि, जीएसटी लगने के चलते अब रंग, गुलाल व अन्य होली के सामान 10 से 18 प्रतिशत महंगे हो गए है. इसकी वजह से रंगों का कारोबार पिछली बार की अपेक्षा बहुत कम हुआ है. इस जीएसटी के चलते रंग गुलाल और अबीर की बिक्री पर असर पड़ रहा है. वहीं पिचकारी पर 12 प्रतिशत टैक्स देना पड़ रहा है.

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