28 साल पुरानी उर्दू भवन की लाइब्रेरी, अब डिजिटल प्लेटफार्म पर

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[सनव्वर शफी] भोपाल :

आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास इतना समय नहीं होता हैं कि, वे किसी लाइब्रेरी में जाकर अपनी पसंदीदा बुक्स को पढ़ सकें. लोग आज रोजमर्रा के कामों में इतना व्यस्त हो गए हैं कि, उनको घंटों एक ही जगह पर बैठकर किताब पढऩा मुश्किल सा हो गया. लेकिन अगर आपकों अपनी पसंदीदा और फेमस किताबें आपके मोबाइल पर पढऩे को मिल जाए तो क्या कहना हैं. जी हां रीडर्स की इन्हीं परेशानियों और अपने रीडर्स को सुविधा के लिए उर्दू भवन की पुस्तक लाइब्रेरी को www.rekhta.org के सहयोग से डिजिटल लाइब्रेरी में तब्दील किया जा रहा है.

रीडर्स अब मोबाइल पर पढ़ सकेंगे अपनी पसंदीदा उर्दू की बुक्स

जहां उर्दू भवन में बनी 28 साल पुरानी लाइब्रेरी में ऐसी पुरानी और फेमस बुक्स मौजूद है. जो लोगों को ढूढऩे से भी नहीं मिलती हैं. लेकिन इस 28 साल पुरानी लाइब्रेरी में लगभग 14 हजार किताबों को डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराया जा रहा हैं. लगभग 4 महीने से चल रहा ई-लाइब्रेरी का काम अभी तक 75 प्रतिशत पूरा हो चुका हैं. उम्मीद की जा रही हैं कि, लगभग तीन से चार महीने में ई-लाइब्रेरी का काम पूरा हो जाएगा. ई-रीडर्स की डिमांड पर अभी जितनी भी बुक डिजिटल हुई वह रेख्ता की वेबसाइट पर बिना किसी शुल्क के पढ़ सकते हैं.

‘75 प्रतिशत काम पूरा, उपलब्ध है अभी 726 बुक्स’

उर्दू लाइब्रेरी के इंचार्ज मेहबूब आलम ने कहा कि, लाइब्रेरी का 75 प्रतिशत काम हो चुका है. लाइब्रेरी की लगभग 726 किताबों को इस वेबसाइट पर रीडर्स के लिए डिजिटल कर दिया गया है. इस डिजिटल लाइब्रेरी से अब रीडर्स को काफी मदद मिलेंगी. क्योंकि किताबों के शौकीनों को अपनी पसंद की बुक मोबाइल पर घर बैठे नि:शुल्क उपलब्ध हो जाएगी. इससे रीडर्स लाइब्रेरी के बार-बार चक्कर लगाने से भी बच जाएंगे.

सबसे ज्यादा पढऩे वाली किताबें

किताब हयात-ए-सिकंदर, तारीख-ए-अदब उर्दू, पानदान वाली खाला, उर्दू अदब की तंकीर, इसके अलावा शायर अफसाना निगार, मंजू कमर की किताबों को यहां पर आने वाले लोग बड़े ही शौक से पढ़ते हैं.  साथ ही ये वो किताबें हैं जो बहुत ज्यादा पढ़ी जाने वाली हैं। ये किताबें यंगस्टर्स को अपने ओर आकर्षित करती हैं.

उर्दू अकादमी की सचिव डॉ. नुसरत मेहदी ने बताया कि, उर्दू भवन में बनी 28 साल पुरानी लाइब्रेरी है. जिसमें पुरानी और फेमस किताबें मौजूद है, जो लोगों को ढूढऩे से भी नहीं मिलती हैं. लाइब्रेरी की लगभग 14 हजार किताबों को डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराया जा रहा हैं.

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